शनिवार, मार्च 17, 2012

राजभाषा कार्मिकों की समस्याएँ

भारत सरकार के कार्यालय, सरकारी क्षेत्र के उपक्रम, बैंक, केंद्र सरकार के नियंत्रण के निगम और आयोगों में हिंदी लागू करने के रास्ते में नीति संबंधी दस्तावेज़/प्रकाशनों का अनुवाद बहुत ही श्रमसाध्य और मुश्किल कार्य है। कार्यालयों में नीति संबंधी दस्तावेज़/परिपत्र/प्रकाशन आदि अंग्रेज़ी में तैयार किए जाते हैं और उनका हिंदी संस्करण बाद में तैयार कराने के प्रावधान के साथ उन्हें अंग्रेज़ी में ही जारी कर दिया जाता है। इसके पीछे यह मानसिकता काम करती है कि हिंदी अनुवाद कराने में समय लगेगा फलतः कार्रवाई में देर हो जाएगी। इसमें सच्चाई कितनी है यह तो कोई राजभाषा अधिकारी ही बता सकता है। परंतु इसके समाधान के लिए बहुत-सी सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं कंप्यूटर की सहायता से समस्या का हल निकालने में लगी हैं कि अनुवाद के लिए यदि मशीन और इसके लिए तैयार किए गए सॉफ़्टवेयरों की सहायता ली जाए तो किसी भी दस्तावेज़ का हिंदी रूपांतर साथ-साथ तैयार हो सकता है। यद्यपि बाज़ार में कई सॉल्यूशन उपलब्ध हैं परंतु \'गूगल ट्रांस्लेट\' के अलावा कोई और सॉल्यूशन कारगर नहीं है। अतः \'गूगल ट्रांस्लेट\' ऑनलाइन सॉफ़्टवेयर के साथ मिलाकर उसके द्वारा किसी भी अंग्रेज़ी दस्तावेज़ का हिंदी रूपांतर साथ-साथ तैयार किया जा सकता है। परंतु इसके लिए अनुवादकों को मशीन ट्रांस्लेशन के कार्य में प्रशिक्षित करना होगा तथा उन्हें टेक्नोलॉजी से सुसज्जित करना होगा। इसके लिए इंटरनेट तथा अनुवाद करने की सामग्री की सॉफ़्टकॉपी उपलब्ध कराना होगा। सरकारी कार्यालय और इनमें नियुक्त राजभाषा कर्मियों को सकारात्मक रुख अपनाते हुए संजीदा और कारगर प्रयास करना होगा।

5 टिप्‍पणियां:

  1. सार्थक और ज्ञानप्रद पोस्ट आभार

    उत्तर देंहटाएं
  2. डा. यादव जी,
    मैं आपके इन विचारों से पूर्णतयः सहमत हूँ.

    उत्तर देंहटाएं
  3. राजभाषा कार्यान्वयन के लिए सकारात्मक सोच और आधुनिक तकनीक का प्रयोग करना चाहिए। धन्यवाद डॉ. दलसिंगार यादव जी
    आपके अनुभव और चिंतन का हमें मार्गदर्शन मिल रहा है।

    उत्तर देंहटाएं

क्या रुपए का नया प्रतीक क्षेत्रीयता का परिचायक है?