मंगलवार, अगस्त 28, 2012

भारतीय भाषाओं के लिए एक सामान्य लिपि - देवनागरी

भारतीय रिज़र्व बैंक के कुछ लोगों ने याहू में समूह बनाया है और अपने विचार व्यक्त करते हैं। हमारे एक सहकरमीं,  श्री नागराजन ने लिखा है कि मैं अमरीका में था और वहाँ पर एक महिला से मिला जो बहुत ही फ़र्राटे से हिंदी बोल रही थीं। उस महिला को देखकर मुझे ग्लानि हुई कि मैं हिंदुस्तानी हूँ और मुझे हिंदी नहीं आती। मेरी मातृ भाषा तमिल है। अनेक लिपियाँ होने के कारण मैं अनेक भाषाएं नहीं सीख पा रहा हूँ। अतः मेरा मानना है कि सभी भारतीय भाषाओं के लिए एक सामान्य लिपि देवनागरी हो तो भारतीय भाषाएँ सीखना आसान हो जाएगा।

श्री नागराजन का सुझाव बहुत ही अच्छा और देश हित में है। इससे देशभर में एकता का सूत्र मज़बूत होगा। हमें श्री नागराजन के विचार को आगे बढ़ाना चाहिए।

2 टिप्‍पणियां:

  1. सभी भाषाओं की एक लिपि होने से सारी समस्याएं हल हो सकतीं हैं । बहुत ही सार्थक विचार है । इस दिसा में सोचा जाना ही चाहिये ।

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