हिंदी माध्यम के रूप में लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
हिंदी माध्यम के रूप में लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, मई 21, 2011

भाषा आंदोलन में हिंदी ब्लॉगों की भूमिका


हिंदी के अधिकतम ब्लॉगों को देखने से ज्ञात होता है कि इनके व्यवस्थापकों ने स्वप्रकाशन के लिए इनका सृजन किया हो। इनमें स्वरचित कविताएं, कहानियाँ, कवि गोष्ठियों की चर्चाएं, कहानियों/उपन्यासों की कृतियों के लोकार्पण समारोहों की चर्चाएं प्रकाशित होती रहती हैं। इन लेखनों से सूचना प्रौद्योगिकी, ज्ञान-विज्ञान की नवीनतन विधाओं/विषयों आदि के शब्द-चयन और ध्वनि-सौंदर्य का बोध पैदा नहीं होता है। भाव, भाषा, लय और अलंकरण के विविध उपकरणों का भी बोध बमुश्किल ही होता है। इन ब्लॉगो के व्यवस्थापक तो केवल हिंदी के ही ज्ञाता नहीं हैं। इनमें से बहुतेरे वैज्ञानिक, इंजीनियर, डॉक्टर, विधिवेत्ता और समाज विज्ञानी हैं। इन लोगों ने भी अपने लेखन का विषय कविता और कहानी ही रखा है। परंतु एकाध लोगों ने अपने लेखन का विषय अपने व्यावसायिक क्षेत्र के अनुरूप ही रखा है, जैसे, दिनेशराय द्विवेदी विधि के विषयों पर हिंदी में अच्छा और मानक लेखन करते हैं। ऐसे अन्य ब्लॉगर बंधुओं से भी अपेक्षित है कि वे ज्ञान-विज्ञान की नवीनतन विधाओं/विषयों पर हिंदी में लिखें ताकि हिंदी में अभिव्यक्ति के लिए शब्द और परंपरा का सृजन हो। भाषा को संपन्न और समृद्ध बनाने के लिए जिन ब्लॉगों का सृजन किया गया है यदि वे हिंदी को सर्व उद्देश्य की पूर्ति के लिए सक्षम बनाने के अपने उद्देश्य से भटक जाएंगे तो हिंदी को इसका वांछित स्थान नहीं दिला पाएंगे और अंग्रेज़ी अनंतकाल तक राज करती रहेगी।    
  

क्या रुपए का नया प्रतीक क्षेत्रीयता का परिचायक है?